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पीएम बनने से पहले चीन को लाल आंखे दिखाने वाले मोदी पीएम बनने के बाद नैन लड़ा रहे है

आपको याद होगा मोदी जी का 2014 का वो जुमला जब उन्होंने कहा था कि वे पीएम बने तो चीन को लाल। आंखे दिखायेगे और चार से लगातार चीन जा रहे है पर लाल आंखे दिखाना तो दूर की बात बात तक नही कर ना रहे है।

प्रधानमंत्री “मोदी जी” का “स्वागत” करने “चीन” ने “उप विदेश मंत्री” को भेजकर हमारे महान लोकतंत्र का मज़ाक किया है !

ये वही चीन है, जिसके राष्ट्रपति को भारत में खुश करने के लिए मोदी जी ने दिन रात एक कर दिये हैं ।

आज पीएम मोदी जी चीन के दौरे पर हैं। विदेश मंत्रालय इस दौरे के कारणों को पर्सनल बता रहा है। 70 सालों में ये पहली बार है जब देश का पीएम व्यक्तिगत कारणों से विदेश गया है। सनद रहे देश का प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधित्व करता है। पर्सनल जैसा शब्द तभी इस्तेमाल किया जाता है जब विदेश में उसकी कोई रिश्तेदारी हो।

लाल आंखे

खैर, अपने देश मे प्रोटोकॉल तोड़ कर चीन के जीन पिंग को लिपट सिपट कर रेड कार्पेट वेलकम देने वाले मोदी जी को एयरपोर्ट पर चीनी विदेश मंत्रालय का एक सहायक मंत्री ही रिसीव करने आया। हमारे परिधान मंत्री को एक ही दिन में 6 बार ड्रेस बदलने के लिए मजबूर किया गया।

ज्ञात हो भारत से चीन का एकतरफा व्यापार 388000 करोड़ है। संख्या दुबारा पढ़ लीजिये, तीन लाख अट्ठासी हजार करोड़,अंतराष्ट्रीय भाषा मे 59.8 अरब डॉलर। ये एक साल का आंकड़ा है ।

इसका अगर 15% भी प्रॉफिट मार्जिन निकाला जाए, तो हर साल 57000 करोड़ का फायदा चीन को होता है ।

संघ की एक शाखा स्वदेशी जागरण मंच चीनी सामानों के बहिष्कार के पर्चे स्कुलो और पार्कों में बांटता है। उनको बता दूं कि WTO की व्यापार नीति के अंतर्गत कोई भी देश जिसने wto पर हस्ताक्षर किए है किसी भी देश से व्यापार पर प्रतिबंध नही लगा सकता। एकमात्र रास्ता बहिस्कार ही है, जिसकी दम इस कमजोर दिल व्यापारियों की सरकार में तो नही है।

नोट कर लीजिए ऑफिशियल विदेश यात्रा पर मोदी जी अभी तक आस्ट्रेलिया, मलेशिया, थाइलैंड, म्यांमार, जापान, भुटान, नेपाल, चीन, सिंगापोर, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इरान, रूस, कजाकिस्तान, तुर्की, UAE साउदी अरब, बहरीन, तंजानिया, SA, केन्या, मोजाम्बीक स्विटजरलैंड, फ्राँस, जर्मनी, बेल्जियम, आयरलैंड, वेल्स, इंगलैंड, अमेरिका, मेक्सिको, ब्राजील जा चुके हैं। हर विदेश यात्रा में उनके चुनावी फ़ायनेंसरो अम्बानी, अडानी, जिंदल, नीरव मोदी जैसों ने बिजनेस डील पर साइन किये हैं।

डोकलाम में सड़क ,हेलीपैड और सैन्य अड्डे बना चुका चीन अपनी विस्तारवादी नीति के लिए जाना जाता है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर कब्जा करने की मुहिम शुरू कर दी है। इसके तहत उसने अरुणाचल प्रदेश के कई शहरो के नाम बदल दिए है। अब अगले कुछ महीनों में जाली दस्तावेजो के सहारे चीन इन शहरों से अपना पुँराना नाता जोड़कर दिखायेगा। पिछले कई सालो से चीन अरुणाचल के लोगो को दक्षिण तिब्बत का निवासी बताता रहा है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कई इलाकों के तिब्बती नामों का मैनडरिन में अनुवाद करना भी आरम्भ कर दिया है।

फिर भी हमारी सरकार को अपने देश के बाजारों को चीनी वस्तुओ से भर रही है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वो कौन सा पर्सनल एजेंडा है जिसके तहत सरदार पटेल की मूर्ति चीन में बनवाई जाएगी। योग दिवस की चटाइयां चीन से मंगवाई जाएँगी। अम्बानी के रिलायंस पावर के लिए मशीने और jio के सिम चीन से खरीदे जायेंगे। एटीएम और स्वाइप मशीने चीन सप्लाई करेगा। चीन के बने इलेक्ट्रानिक और खिलौनो से भारतीय बाजार भरे हुए हैं।

भक्त हों या उनके भगवान सभी की राष्ट्रभक्ति पाकिस्तान के नाम पर जीवित है। चीन के नाम से दस्त लग जाते हैं। समाजवादी नेताओं लोहिया जी से मुलायम सिंह जी तक सभी ने बार बार संसद में चीन को प्रमुख शत्रु बताया है। फिलहाल चेतावनी बेअसर है। पर्सनल एजेंडा और खून में व्यापार सर्वोपरि है – राजेश यादव

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