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कठुआ केस पर सवाल उठाने वालों के मुंह पर लगा ताला, खारिज हुई सभी दलीलें

जम्मू एंड कश्मीर के कठुआ केस में जिस तरह से धर्म की राजनीति हो रही है उससे लगता है कि आज देश दो वर्गों में बंट चुका है। एक वर्ग वो जो सब कुछ देख समझ कर भी राजनीतिक षडयंत्रों का शिकार हो रहे हैं और दूसरा वो जो इंसानियत के लिए अपनों से भी लड़ते दिख रहे हैं। इन सब को देख कर बस एक ही सवाल पूछने का मन होता है कि साल 2012 के ‘निर्भया’ रेप एंड मर्डर केस की पुलिस जांच पर किसी ने कोई सवाल क्यों नहीं किये जबकि उतनी ही निर्दयिता से कठुआ रेप एंड मर्डर केस में हुई पुलिस जांच पर कुछ लोग सवाल पर सवाल उठाते चले जा रहे हैं? क्या इसलिए कि निर्भया केस में पीड़िता का नाम ज्योति सिंह पांडेय था और कठुआ केस में पीड़िता का नाम आसिफा है? अगर ऐसा है तो वो कौन है जो अपराधियों को बचाने के लिए लोगों को धर्म के नाम पर बरगला रहा है।

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जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वेद कठुआ जिले के रहने वाले हैं। वो सन् 1988 में आइपीएस बने। उनकी ड्यूटी के डेढ़ साल के कार्यकाल में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में सबसे ज्यादा आतंकवादी हमलों का बहादुरी से सामना किया। उनकी बहादुरी को देखते हुए मात्र डेढ़ साल में ही उन्हें प्रमोशन मिला और वो एएसपी से एसपी बना दिये गये। उन्होंने यूके के ब्रमशील पुलिस स्टाॅफ काॅलेज में होने वाले इंटरनेशनल कमांडर्स प्रोग्राम के अंतर्गत रणनीतिक प्रबंधन में टाॅप किया हैं। राज्य के सबसे बड़े इस पुलिस अधिकारी का कहना है कि कठुआ केस से ज्यादा विभत्स घटना उनके लिए और कुछ नहीं हो सकती है। यह एक बहुत ही जघन्न अपराध है जो इससे ज्यादा बुरा और कुछ नहीं हो सकता है। विशेष जांच दल ने बहुत ही पेशेवर तरीके से जांच की और चार्जशीट दाखिल की है। अब हम जल्द ही न्याय मिलने की उम्मीद में है।

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बता दें कि विशेष जांच दल ने आसिफा केस में सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा सहित देवस्थान मंदिर का पुजारी संजी राम और उसका बेटा विशाल, विक्रम व स्थानीय निवासी प्रवेश कुमार को गिरफ्तार किया है।

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आसिफा का केस लड़ने वाली महिला अधिवक्ता दीपिका सिंह राजवत को केस से हटने के लिए धमकियां मिल रही हैं। दीपिका का कहना है कि उसकी हत्या या उसके साथ रेप हो सकता है। लेकिन वो इस केस से पीछे हटने वाली नहीं हैं। दीपिका ने शुरू में ही अपने इरादे साफ ज़ाहिर कर दिये थें जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। उस वक्त दीपिका ने कहा था कि अधिवक्ता संगठन उसे केस छोड़ने के लिए धमका रहे हैं लेकिन मेरी भी एक पांच साल की बच्ची है। अगर अपराधियों को सजा नहीं हुई तो कल को मेरी बच्ची के साथ भी आसिफा जैसी घटना हो सकती है।

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कुछ लोग सोशल मीडिया पर यह बोलते दिख रहे हैं कि केंद्र की बीजेपी सरकार को बदनाम करने के लिए कठुआ केस में पुलिस विपक्ष के इशारों पर चल रही है। ऐसे लोगों से अगर साल 2012 के निर्भया केस की बात की जाये जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी, उस वक्त इन लोगों ने यह सवाल क्यों नहीं उठाये कि केंद्र की कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए पुलिस विपक्ष के इशारों पर चल रही है। जबकि वर्तमान की भांति उस वक्त भी केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार थी। कुछ लोग यह भी बोल रहे हैं कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं इसलिए बीजेपी सरकार को बदनाम करने की साजिश हो रही है। बता दें कि दिसम्बर 2012 में जब निर्भया कांड हुआ उस वक्त भी लोकसभा चुनाव होने वाले थें लेकिन ऐसी बातें किसी ने नहीं उठाई जैसे इस वक्त सुनने में आ रही हैं।

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बहरहाल, मासूम से दरिन्दगी और पुलिस की जांच पर उंगली उठाने वाले लोगों को जवाब देने के लिए शनिवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रेस कांफ्रेन्स की। जेके पुलिस की ओर से मीडिया प्रभारी ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के हवाले से बताया गया था कि पीड़िता के साथ यौन शोषण हुआ है। चिकित्सकों की राय के आधार पर रणबीर दंड संहिता की धारा 376 को भी इस केस में जोड़ा गया है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि बच्ची को बंधक बना कर उसके साथ रेप किया गया और नशीली दवाएं दी गई। बच्ची की मौत दम घुटने से हुई है। इसके साथ ही रिपोर्ट में बच्ची के ब्लड सैंपल भी मंदिर में मिले सैंपल से मैच करते हैं। प्रेस कांफ्रेन्स में कहा गया कि विशेष जांच दल द्वारा सबूत, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। बता दें कि वकीलों के भारी प्रदर्शन के बीच जांच दल 9 अप्रैल को आठ में से सात आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल कर चुका है। पूरक आरोप-पत्र जल्द ही दाखिल करने की बात कही गई है।

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Jyoti Singh Pandey

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