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जानवर की कुर्बानी पर छाती पीटने वाले संघी, मंदिर में जानवरों की बलि पर खामोश क्यों हैं

वेब डेस्क। बीते दो सितंबर को मुस्लिम समुदाय का दूसरा बड़ा त्यौहार ईद-उल-जुहा यानी बकरीद पर सदियों से जानवर की कुर्बानी होती आ रही है. इस कुर्बानी पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी जब तक मोदी और योगी सरकार सत्ता में नहीं आई थी. केंद्र में मोदी और उत्तर प्रदेश में भगवाधारी योगी सरकार आने के बाद संघी परिवार मुस्लिम समुदाय के हर एक त्यौहार पर कुछ न कुछ विवाद जानबूझ कर पैदा करने लगा है. मकसद केवल सांप्रदायिक तनाव बना कर बहुसंख्यक वोटों की राजनीति करना है.

इस बार की बकरीद पर कुछ मुस्लिम ने केक पर बकरे की तस्वीर बनवाकर काटा जिसे क़ुरबानी का नाम दिया गया. मीडिया ने इसे मुस्लिम समुदाय की ओर से पहल बताया. लेकिन वास्तव में ये संघियों के एक और प्रोपोगेंडा की नाकामी थी. हमेशा से परिस्थितियों को सामान्य बनाने के लिए मुस्लिम समुदाय को ही त्याग और समझौता करना पड़ता है? मंदिरों में बलि के नाम पर जो सैकड़ों-हजारों बेजुबान जानवरों को बेरहमी से काट दिया जाता है उस पर किसी संघी जीवप्रेमी की भावनाएं आहत नहीं होती हैं. वीडियो बिहार के मुंडेश्वरी मंदिर की है जहां बकरों की बलि दी रही है. यह वीडियों सोशल मीडिया फेसबुक पर राजीव त्यागी ने शेयर की है. उनका भी यही सवाल है कि आखिर वो जीवप्रेमी कहां हैं जो बकरीद पर जानवरों की बलि पर छाती पीट रहे थे और मंदिर में काटे जा रहे बकरे के केक पर चुप्पी साधे हुए हैं.

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