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मोदी जी, किसानों से अपने झूठ और फ़रेब के लिये माफ़ी माँगिये, वरना इनकी आह में भस्म हो जायेंगे

ये किसानो के पाँव है मोदी जी। इन्हें पकड़ कर माफ़ी माँगिये ये माफ़ कर देंगे आपको, आपके झूठ छल और फ़रेब के लियें। अन्नदाता की माँगो को नहीं मानोगे तो इन ग़रीब की आह में भस्म हो जायेंगे आप। ये सब आपसे जायज़ हक़ माँग रहे है। कबीर का दोहा याद आ गया एक शब्द जोड़ कर लिख रहा हूँ। किसानो को ना सताइये, वाकी मो टी हाय। मुई खाल की स्वाँस से सार भस्म हो जायें। आज सुबह जब ट्राफ़िक जाम या सड़कों पर कोलाहल के नाम पर कुछ लोग छाती या स्टेटस या चैनल पीट कर मातम मनाएँ, तो उन्हें शालीनता से याद दिलाया जाए कि ये सब ऑटो या ओला या ऊबर में नहीं, अपने पैरों पर चल कर आए है। इस दो सौ किलोमीटर का फ़ासला पैदल तय करने में जितनी सनक है, उससे कहीं ज़्यादा बेबसी।

ये किसानो के पाँव है मोदी जी। इन्हें पकड़ लीजिये और माफ़ी माँगिये ये माफ़ कर देंगे आपको, आपके झूठ छल और फ़रेब के लियें। अन्नदाता की माँगो को मान लीजिये मोदी जी वरना ग़रीब की आह में भस्म करने वाली आग होती है। ये सब आपसे जायज़ हक़ माँग रहे है। कबीर का दोहा याद आ गया एक शब्द जोड़ कर लिख रहा हूँ। किसानो को ना सताइये, वाकी मोटी हाय। मुई खाल की स्वाँस से सार भस्म हो जायें।

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