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Video : मोदी सरकार में संविधान से हो रही छेड़छाड़, लिख दिया भगवद् गीता का स्लोक, अभी तक कोई संशोधन नहीं

साल 2014 के लोकसभा इलेक्शन में बीजेपी की ओर से पीएम फेस रहे नरेंद्र मोदी ने देश को गुजरात माॅडल दिखा कर विकास के नाम पर चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से जीत हासिल की। लेकिन बीजेपी की जीत के बाद जल्द ही यह साफ हो गया कि जिसे देश की जनता विकास समझ रही थी, दरअसल वो हिन्दुत्वाद था जिसका खामियाज़ा खुद गुजरात के व्यापारियों को भी अब तक उठाना पड़ रहा है। उसी हिन्दुत्वाद का नतीजा है कि भारतीय संविधान पर साल 2015 के एडीशन से अनैतिक तरीके से भगवद् गीता का स्लोक छापा जा रहा है जिसके खिलाफ एडवीन ओल्डन्स ने आवाज़ उठाई और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश सरकार को इसकी लिखित शिकायत करने के बावजूद अब तक किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ। मामला अब न्यायालय में है।

अम्बेडकरवादी अभियान से जुड़े ‘विज़न आॅफ बाबा साहब वेलफेयर एसोसिएशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवीन ओल्डन्स से यूपी की राजधानी लखनऊ में हुई बातचीत के दौरान उन्होने द डेलीग्राफ संवाददाता से बताया कि साल 2015 में छापी गई 22वीं एडीशन की भारतीय संविधान के शुरूआती पन्नों में भगवद् गीता का एक स्लोक अनैतिक तरीके से छापा गया था जिसे लेक्सिस-नेक्सिस पब्लिकेशन ने प्रिंट किया है।

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एडवीन का कहना है कि इसके बाद के अन्य दूसरे एडीशन्स में भी वही स्लोक लगातार छापा जा रहा है। इस बात को लेकर वो काफी नाराज़ दिखे। उनका कहना है आज संविधान पर मनुवाद हावी हो रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत राष्ट्रपति कार्यालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक की है। दो साल से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अब तक किसी ने उनकी शिकायत पर गौर नहीं किया।

  • http://lexisnexis.in/introduction-to-the-constitution-of-india-22nd-edn.htm

मध्यप्रदेश के रहने वाले एडवीन ओल्डन्स करीब एक साल से अपनी वैन के जरिये देश के कई प्रदेशों में जाकर भारतीय संविधान को जानने और इसके रचिता डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के विचारधाराओं से जुड़ने के लिए युवाओं में जागरूकता अभियान चला रहे हैं जिसका उन्होंने ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ का नाम दिया है। इस अभियान से करीब 150 लोग जुड़े हुए हैं जिन्होंने अगले सात सालों तक चलने वाले इस अभियान के दौरान अपना सरनेम भारतीय रखने का फैसला लिया है। एडवीन खुद अपने नाम के साथ भारतीय जोड़ चुके हैं।

एडवीन के इस अभियान का मकसद देश से जाति-धर्म द्वेष खत्म कर सभी को भारतीय बनाना है जहां सभी को सामाजिक तौर पर एक समान दर्जा मिल सके। उन्होंने प्रदेश सरकारों से कक्षा 5 से 12 तक संविधान को पाठ्यक्रम के रूप में बच्चों को पढ़ाने की मांग की है। अप्रैल 2017 में मध्यप्रदेश के मऊ से शुरू हुआ एडवीन का यह अभियान अभी तक मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र के कई जिला और तहसील में हो चुका है। इस दौरान उनके दो साथी मनजूर अहमद कुरैशी और कमल पचायर की हार्टअटैक और मलेरिया से मृत्यु भी हो चुकी है।

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