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देश पर मंडराया उभरती अर्थव्यवस्थाओं का खतरा, चीन, पाकिस्तान, बांगलादेश से पिछड़ा भारत

आज से पहले देश की इतनी खतरनाक स्थिति शायद ही कभी देखने को मिली होगी जहां मोदी से पहले गोदी मीडिया सरकार के बचाव में कसीदे पढ़ने लगती है। देश की जनता को वास्तविक जानकारी से दूर रख कर आने वाले खतरों से अंजान किया जा रहा है। देश में जहां धार्मिक और जातीय हिंसा से लेकर कानून-व्यवस्था और लोकतंत्र पहली बार सबसे ज्यादा खतरे में है तो वहीं समावेशी वृद्धि सूचकांक में 103 देशों की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की रपोर्ट में भारत पर बड़ा खतरा दर्शाया गया है।

विश्व आर्थिक मंच, डब्ल्यूईएफ की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में 103 देशों में भारत का स्थान 62वें पर। जबकि चीन 26वें, बांगलादेश 34वें और पाकिस्तान 47वें स्थान पर है। पिछले साल भारत 79 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 60वें स्थान पर था तो चीन 15वें और पाकिस्तान 52वंे स्थान पर था। मंच ने अपनी वार्षिक शिखर बैठक से पहले सूची जारी की है। बता दें कि, पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित विश्व के कई शीर्ष नेता इस बैठक में भाग ले रहे हैं। रिपोर्ट में समावेशी आधुनिक विकसित अर्थव्यवस्था में नाॅर्वे पहले नंबर पर है जबकि लिथुआनिया उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है।

रिपोर्ट के मुख्य आधार

डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट मुख्य रूप से देश के नागरिकों के रहन-सहन का स्तर, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊपन, भविष्य की पीढ़ियों और कर्ज़ के बोझ से संरक्षण आदि पर आधारित होती है। उभरती अर्थव्यवस्था की प्रगति रिपोर्ट तीन निजी स्तंभों- वृद्धि एवं विकास, समावेशन और अंतर पीढ़ी इक्विटी के आधार पर होती है। 103 देशों की ताजा रिपोर्ट को 29 विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देश और 74 उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश में बांटा गया है। इस प्रकार भविष्य में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के क्षेत्र में भारत की बिगड़ती स्थिति कई तरह से घातक साबित हो सकती है।

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