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रोहिंग्या शरणार्थियों

UN की रोहिंग्या शरणार्थियों पर आलोचना को भारत ने किया खारिज …

रोहिंग्या शरणार्थियों, जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख की आलोचना को पुरजोर ढंग से खारिज करते हुए मंगलवार को भारत ने कहा कि वह इन टिप्पणियों से हैरान है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने सोमवार को रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने के मुद्दे और धार्मिक असिष्णुता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को खतरे को लेकर भारत की आलोचना की थी. वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 36वें सत्र में बोल रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र-जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव के. चंदर ने कहा, ‘हम मानवाधिकार उच्चायुक्त की ओर से की गई कुछ टिप्पणियों से हैरान हैं. यह उस आजादी और अधिकारों की अनुचित विवेचना है, जो एक जीवंत लोकतंत्र की गारंटी हैं और व्यवहार में हैं.’ हुसैन की टिप्पणियों को खारिज करते हुए चंदर ने कहा कि चुनिंदा और गलत रिपोर्ट के आधार पर इस तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से किसी समाज में मानवाधिकार की बेहतर समझ नहीं पैदा होती है.

संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या हैं और इनमें से 16,000 लोगों को शरणार्थी का दस्तावेज मिला है. चंदर ने कहा, ‘सबका साथ, सबका विकास के हमारी सरकार के लक्ष्य से समावेशी विकास हासिल करने की हमारी प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है.’

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