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बेकाबू पेट्रोल की कीमतों को रोकने में नाकाम सरकार ने बुलाई इमरजेंसी बैठक, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों को दी गई छूट जारी रहेगी

नई दिल्ली। मोदी सरकार की समीक्षा के नाम पर पेट्रोल कंपनियों को जरूरत से ज्यादा छूट देने का नतीजा अब पूरे देश की जनता भुगत रही है. देशभर में खामोशी के साथ प्रति दिन बेकाबू पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने देश की आम जनता की कमर तोड़ दी है. अब अनियंत्रित कीमतों को काबू में करने के लिए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे लेकर इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है. लेकिन डायनमिक प्राइस का फाॅर्मूला पेट्रोलियम मंत्रालय अब भी खत्म करने पर राजी नहीं है.

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(पिछली सरकार में पेट्रोल के बढ़े दाम को लेकर प्रदर्शन करते राजनाथ सिंह इन दिनों कहां हैं?)

पैट्रोलियम मिनिस्टर धमेंद्र प्रधान का इस मामले पर कहना है कि डायनमिक प्राइस का फॉर्म्यूला बेहद ही पारदर्शी है, जिसे बदला नहीं जा सकता है. उनका कहना है कि इसका इसका फायदा तुरंत ग्राहकों को दिया जाता है. उन्होंने बताया कि आगे सरकार पेट्रोलियम प्रोडकट्स को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर सकती है.

आपको बता दें कि जब से डायनमिक प्राइस का फाॅर्मूला सरकार ने लगाया है तब से पेट्रोल की कीमतों में इज़ाफा ही हुआ है और मोदी सरकार ने बहुटैक्स वाले पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर जीएसटी न लगाकर पेट्रोल की कीमतों को कम होने से रोक दिया है.

खबरों के मुताबिक, महंगाई के मामले में पेट्रोल ने पिछले 3 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है. दिल्ली-मुंबई में पैट्रोल की कीमतें 3 साल के हाई लेवल पर पहुंच गई हैं. मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपए और दिल्ली में 70.38 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है. क्रूड में कमजोरी और रुपए में मजबूती आने के बाद भी पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को जनता को कोई राहत नहीं मिल रही है.

बता दें कि केंद्र सरकार ने इस साल 16 जून से देशभर में पैट्रोल-डीजल की कीमतों के मामले में डायनैमिक फ्यूल प्राइसिंग लागू किया था. इसके तहत पैट्रोल-डीजल की कीमतें 16 जून के बाद से हर रोज कच्चे तेल के दाम के हिसाब से बढ़ती-घटती हैं

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