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RSS के कार्यक्रम में वर्दी पहने पहुंचे BSF के डीजी केके शर्मा

RSS के कार्यक्रम में वर्दी पहने पहुंचे BSF के डीजी केके शर्मा, तृणमूल कांग्रेस ने दी गृह मंत्रालय से शिकायत की धमकी

कभी राम मंदिर बनवाने की शपथ लेते हुए पुलिस विभाग के महानिदेशक (डीजी), होमगार्ड सूर्य कुमार शुक्ला नजर आते हैं तो कभी हिन्दुत्व का एजेंडा थामे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रम में बीएसएफ के डीजी केके शर्मा दिखाई दे रहे हैं। जिस पर तृणमूल कांग्रेस ने नाराज़गी जताई है. ये सिलसिला देश और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से तेज हो गया है और अधिकारियों को इससे कोई फर्क पड़ता भी नहीं दिखाई दे रहा है। बता दें कि आरएसएस संगठन पर साल 2007 के मालेगांव, अजमेर दरगाह और समझौता एक्सपे्रस बम धामाकों का आरोप भी लग चुका है।

रविवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाला में संघ सहयोगी दल सीमांत चेतना मंच द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक केके शर्मा वर्दी पहने पहुंचे। इस पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट कर कहा- ‘बीएसएफ के डीजी केके शर्मा आरएसएस समर्थित एनजीओ के समारोह में कोलकाता में वर्दी में क्या कर रहे हैं?’। तृणमूल कांग्रेस इस बात से इतनी खफा है की टीएमसी की ओर इस मुद्दे को केंद्रीय गृहमंत्री के समक्ष ले जाने की धमकी भी दे डाली। केके शर्मा दो दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन पहुंचे थे जिसमें असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल से आरएसएस के कई पदाधिकारियों के साथ ही करीब 300 प्रतिनिधि शामिल थें।

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बता दें कि इससे पहले इसी महीने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘राम मंदिर निर्माण, समस्या और समाधान’ नाम के एक कार्यक्रम में यूपी के महानिदेशक होमगार्ड सूर्य कुमार शुक्ला ने कार्यक्रम में शामिल होकर खुलेआम एक शपथ लिया था जिसमें उन्होंने कहा था- ‘हम सब राम भक्त आज इस कार्यक्रम के दौरान यह संकल्प लेते हैं कि जल्द से जल्द राम मंदिर का भव्य निर्माण हो. जय श्री राम’। इस शपथ-ग्रहण की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हे सफाई भी देनी पड़ी थी।

राम मंदिर बनवाने की शपथ लेते हुए पुलिस विभाग के महानिदेशक (डीजी), होमगार्ड सूर्य कुमार शुक्ला

वहीं आइपीएस एसोसिएशन ने शुक्ला की आलोचना करते हुए ट्वीट करते हुए लिखा था कि, ‘हम वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी (सूर्य कुमार) के इस काम से खुद को अलग करते हैं और यह बात दोहराते हैं कि ऐसा करना निष्पक्षता, न्याय और ईमानदारी के खिलाफ है’।

 

 

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