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झूठा निकला मोदी का वह बयान कि जिसमे उन्होंने कहा था कि किसी भी उद्योगपति का लोन माफ नही किया !

झूठा निकला मोदी का वह बयान जिसमे उन्होंने कहा था कि किसी भी उद्योगपति का लोन माफ नही किया है। जबकि लाखों किसान अपनी फसल का दाम लेने के लिए सड़कों पर है खुद के किये हुये वादे हर साल दो करोड रोज़गार गायब है महंगाई चरम पर है पेट्रोल डीजल और रसोई गैस के रोज दाम बढ़ते  जा रहे है आतंकवादियों को मार नही पा रहे चीन अंदर घुस आया मगर मोदी सरकार चंद अमीरों पर मेहरबान सरकार, 184272 करोड़ का कॉर्पोरेट लोन माफ कर चुकी है।

देशभर में कर्ज माफी के लिए किसान सड़कों पर हैं लेकिन उनके लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। जबकि सरकार लगातार उद्योगपतियों का हज़ारों करोड़ का कर्ज़ माफ़ कर रही है।

गौरतलब है कि देश के बैंकों पर एनपीए का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसी बढ़ते एनपीए के कारण बैंकों को हज़ारों करोड़ का घाटा हो रहा है। एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होता। इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का है।

अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालियाँ दिखा देते हैं और उनका लोन एनपीए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग मोदी के सामने से ही देश छोड़कर भाग जाते हैं।

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सामूहिक शुद्ध घाटा 2017-18 में बढ़कर 87,357 करोड़ रुपये हो गया। ये भारत के इतिहास में सबसे ज़्यादा है। यह इतनी बड़ी रकम है कि हर भारतीय को लगभग 670 रुपए मिल सकते थे।

इसके बावजूद सरकार उद्योगपतियों का लोन माफ़ कर रही है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) के मुताबिक, अप्रैल 2017 से दिसम्बर 2017 तक सरकार ने 84,272 करोड़ का लोन राईट ऑफ कर दिया है।

कहने को तो राईट ऑफ किया गया लोन सीधे तौर पर कर्ज माफी नहीं है लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है कि राइट ऑफ किया जाए और फिर वो वापस आ गया हो।

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