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संघ के फैलाये अब तक के सारे झूठ हुये बेनकाब, देश की जनता को संघ से होशियार रहने की जरूरत।

संघ के फैलाये अब तक के सारे झूठ बेनकाब हो चुके है, देश की जनता को संघ से होशियार रहने की जरूरत है। संघियों के फैलाये झूठ से निजात पाएं और जाने कि सावरकर, गोलवालकर, श्यामा प्रसाद क्यों प्रधानमंत्री नही बने ?

1946 के चुनाव 1585 सीटो पर हुये थे..कांग्रेस ने 923 सीटे जीती थी…कुल हिन्दू वोट का 91% कांग्रेस को मिला था.. और आप ? तो सुनिये  आपके पास तो उम्मीदवार भी नही थे..हिन्दू महासभा के केवल 18 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे और सब हार गये थे..आपका सूपड़ा साफ हो गया था..हिंदुवो ने आप लोगो के मुह पर करारा थप्पड़ मारा था..औकात क्या है ये सवाल करने की ?

नेहरू घोषित चेहरा थे कांग्रेस के उन चुनावो में..चुनाव कांग्रेस ने जीता था और कांग्रेस ने चुनाव के पहले ही बोल दिया था कि कौन बनेगा प्रधानमंत्री..आगे जवाब सुनते जाइये।

एक झूठी कहानी के इर्द गिर्द पूरा ताना बाना बुना गया है..1946 में बापू ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) से वोट लिये थे प्रधानमंत्री पद के लिये..15 वोट पटेल के पक्ष में थे और बस एक वोट नेहरू के पक्ष में.. फिर भी बापू ने नेहरू को प्रधानमंत्री बना दिया.. ये सबसे बड़ा झूठ, असत्य और नीचता है.. ऐसा कुछ भी नही हुवा था।

A. भारत मे किसी भी प्रधानमंत्री का चयन भारत के संविधान और विजयी दल के संविधान के आधार पर होता है..उसकी एक मुकम्मल प्रकिया है..

1. PCC को प्रधानमंत्री चुनने का कोई अधिकार नही होता है कांग्रेस के संविधान में..क्या अटल और मोदी , बीजेपी के प्रदेश कमेटियों द्वारा चुने गये थे ? जवाब दीजिये ?

2. किसी भी दल की प्रदेश कमेटी को प्रधानमंत्री तो छोड़िये, मुख्यमंत्री तक चुनने तक का अधिकार नही होता.. या तो पहले से चेहरा घोषित किया जाता है या चुनाव के बाद पार्लियामेंट्री बोर्ड चुनता है, जैसे खट्टर, फडणवीस, मनोहर दास वगैरह..जवाब दीजिये ?

3. कांग्रेस वर्किंग कमेटी और कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री चुनते है..बीजेपी में भी पार्लियामेंट्री बोर्ड ही प्रधानमंत्री का चुनाव करता है..जैसे कांग्रेस ने डॉ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुना था, सोनिया गांधी के सर्वसम्मत चुने जाने के बावजूद।

4. एक झूठ और बोला जाता है कि PCC, कांग्रेस अध्यक्ष को चुनती थी और कांग्रेस अध्यक्ष ही प्रधानमंत्री बनता था..ये कहा लिखा है कांग्रेस के संविधान में? कांग्रेस का संविधान तो इंटरनेट पर उपलब्ध है..दिखा दीजिये..

5. PCC कभी भी कांग्रेस का अध्यक्ष नही चुनती.. AICC के प्रतिनिधि ही कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव करते है।

6. और अगर इस संघी झूठ को सही मान भी लिया जाये तो फिर आचार्य कृपलानी को प्रधानमंत्री बनना चाहिये था..क्योंकि स्वाधीनता के वक्त नेहरू या पटेल नही, आचार्य कृपलानी कांग्रेस के अध्यक्ष थे..कोई जवाब है ?

B. 1936-37 के प्रोविंशयल चुनाव से ले कर 1946 या उसके बाद तक जो भी चुनाव कांग्रेस ने 1964 तक लड़े, सारे चुनावो में नेहरू ही कांग्रेस का घोषित चेहरा थे..और कोई नही था।

C. सवाल अगर योग्यता का है तो किस योग्यता के आधार पर बीजेपी ने मोदीजी को प्रधानमंत्री और अमित शाह जी को अध्यक्ष चुना है ? क्या उनसे ज्यादा योग्य कोई नही था ? आज भी बीजेपी से ही लोग बोलते है कि आडवाणी, मोदी से बेहतर प्रधानमंत्री होते..योग्यता तो एक आपेक्षिक शब्द है..

D. योग्यता की तो बात ही मत कीजिये.. बापू, नेहरू और पटेल तीनो की शैक्षणिक योग्यता मालूम है ? इन तीनो का राजनैतिक कद दुनिया के किसी भी नेता से बड़ा है.. खुद की योग्यता बताइये.. हमारे महापुरुषों की योग्यता पर बोलने का हक क्या है आप लोगो को ? पटेल कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी थे और नेहरू कांग्रेस का चेहरा, केवल भारत मे ही नही , पूरे विश्व मे…

E. हर जमाने मे राजनैतिक समीकरण होते है.. जैसे अटल- आडवाणी, इंदिरामा – प्रणव मुखर्जी वगैरह.. गांधी – नेहरू – पटेल- सुभाष की चौकड़ी विश्व का सर्वश्रेष्ठ राजनैतिक समीकरण माना जाता है जिसने भारत को आज इस मुकाम पर पहुंचाया..

F. एक और बात : आज़ादी के वक्त दो लोगों की सेहत को गोपनीय रखा गया..एक जिन्नाह और दूसरे पटेल.. अगर इन दोनों की सेहत का राज खुल जाता तो सबकुछ उल्टा पुलटा हो जाता..दोनो पर अपने अपने देश को स्थापित करने की जिम्मेदारियां थी..जिन्नाह और पटेल दोनो की तबियत का अचानक खराब हो जाना और दोनो का इस दुनिया से चले जाना, इस बात को ही साबित करता है..

G.1947 में भारत की संसद नही संविधानिक सभा थी..वो एक अंतरिम व्यवस्था थी जिसे आज़ाद भारत का संविधान से लेकर सेना तक बनाना था.. भारत के पहले चुनाव तो 1951-52 में हुये थे..और सरदार पटेल का देहांत तो 1950 में हो चुका था..तो पटेल का पहला प्रधानमंत्री बनने का सवाल आता कहा से है ?

नेहरू का चुनाव सर्वसम्मत रूप से हुवा था जो कि स्वाभाविक था..और कांग्रेस के अंदरूनी मामले में किसी भी ब्रिटिश मुखबिर, दलाल को बोलने का कोई हक नही है।

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