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सीएम को मुझसे क्या काम ! मिलना है तो वे ओपीडी में आएं, डाक्टर का जवाब सुनके सीएम रह गए सन्न ।

बीजेपी के महा संपर्क अभियान को आज तगड़ा झटका लगा, BHU के जाने माने डॉक्टर ने मुख्यमंत्री योगी से मिलने से इंकार कर दिया। सीएम से पहले उनके अफसर डॉक्टर से मिलने गये और उन्हें सीएम के आगमन की जानकारी दी तो उनहोंने वापस लौटा दिया यह कहते हुये कि मुझसे कया काम है मुख्यमंत्री को मिलना हो ओपीडी मे आये।

मरीजों की सेवा ही जिसके जीवन का एक मात्र लक्ष्य हो। सुबह से शाम तक अस्पताल की ओपीडी में वक्त गुजारना जिसकी फेहरिश्त में शामिल हो, जो अपने अक्खड़पन के लिए विख्यात हो, अस्पताल के अलावा और कहीं किसी से न मिलना जिसकी फेहरिश्त में शामिल हो, उसे भला कौन डिगा सकता है उनके आदर्शों से। फिर वो सीएम हों या पीएम कोई फर्क नहीं पड़ता।

ऐसे शख्स से सीएम योगी आदित्यनाथ के मिलने का प्रोग्राम बना दिया जिले आला अफसरों ने। लेकिन अपने वसूलों के पक्के इस चिकित्सक ने साफ इंकार कर दिया। उसके बाद से जिला प्रशासन ही नहीं बल्कि समूची बीजेपी में हड़कंप मचा है।

जान कर आश्चर्य हो सकता है कि इस भौतिकवादी युग में भी एक ऐसा डॉक्टर है जिसके लिए पैसे का कोई महत्व नहीं। केंद्र सरकार की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद भी निःशुल्क सेवा दे रहे हैं, बीएचयू अस्पताल को। बदले में पूरा वेतन तक नहीं लेते। यह प्रख्यात कार्डियोलाजिस्ट जिन्होंने 1974 में लेक्चरर के रूप में बीएचयू में अपना करियर शुरू किया और आज वह बनारस में किसी देवदूत से कम नहीं।

शोहरत ऐसे ही अपने कर्म से कमा लिया। केंद्र सरकार ने 26 जनवरी 2016 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्मश्री से नवाजा। लेकिन जिस ख्वाब को संजोकर मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की उस ख्वाब को टीके लहरी आज भी जिंदा रखे हैं, 2003 में बीएचयू के सर सुंदर लाल चिकित्सालय से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपनी सेवाएं दे रहे है।

इतना ही नहीं, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन से सिर्फ अपने भोजन के लिए पैसा लेते है। शेष पैसा बीएचयू को दान दे देते है। उनकी इस कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए ही उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है।

75 साल की उम्र में भी वक्त के इतने पक्के हैं कि उनके आने-जाने के समय से लोग अपनी घड़ियों का समय मिलाते हैं। घर से पैदल ही अस्पताल तक जाते हैं। शरीर एक दम से हड्डियों के ढांचे में तब्दील हो चुका है। लेकिन मरीजों के लिए भगवान् से कम नहीं।

ऐसी महान शख्सियत को राजनीति में घसीटने का बीजेपी के प्रयास को उस वक्त तगड़ा झटका लगा जब सीएम योगी आदित्यनाथ के वाराणसी आगमन और रविवार को कुछ खास शख्सियतों से संपर्क अभियान के तहत मिलने की योजना बनाई गई। बताते हैं कि इसी सिलसिले में जिले के आला अफसर उनके आवास पर दो-तीन बार गए पर मुलाकात नहीं हो सकी।

शनिवार की शाम को मुलाकात हुई भी तो डॉ लहरी ने पूछा क्या काम है, यहां क्यों आए ? अफसरों ने कहा कि मुख्यमंत्री आपसे मिलने आने वाले हैं, जवाब ऐसा कि मुख्यमंत्री मुझसे क्यों मिलने आ रहे हैं ? मैं अपने आवास पर किसी से नहीं मिलता। उन्हें आना ही है तो ओपीडी में आएं। मैं घर पर किसी से नहीं मिलता। ऐसा जवाब सुन कर अफसर भी सन्न रह गए।

बावजूद इसके सीएम के आगमन के मद्देनजर साफ सफाई कराई जाती रही। जब घर के भीतर साफ सफाई की नौबत आई तो वह फिर से नाराज हो गए और सफाई कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। उनके रुख को देख कर अफसरों ने सीएम का कार्यक्रम कैंसिल किया। लेकिन पूरे शहर में यह बात फैल गई और हर कोई डॉ लहरी के इस रुख का कायल बन गया। चारों तरफ उनकी तारीफ में कसीदे पढ़े जाने लगे।

वैसे भी उन्हें नजदीक से जानने वाले अच्छी तरह से जानते हैं कि उनका राजनीति से कोई सरोकार नहीं। 1974 से 2018 तक वह बीएचयू अस्पताल से जुड़े हैं लेकिन कभी किसी विवाद में नहीं पड़े। जिसने भी देखा उन्हें धरती के भगवान के रूप में ही पूजा।

डॉ लहरी के न मिलने पर सीएम को बीएचयू की पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल और चंद्रमौली उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य से मिलवाया गया। इससे पहले वह प्रसिद्ध गायक पंडित छन्नू लाल मिश्र से जरूर मिले। उन्हें बीजेपी की रीति-नीति से अवगत कराया।

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