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एक था मुसोलिनी और एक था हिटलर और एक है फेकू, तीनो मे कितनी समानताएं !!

हर हिटलरशाही का एक ही अंत

एक था मुसोलिनी —
जो
पक्का राष्ट्रवादी था ! कोई शक
एक धर्म विशेष के लोगों को देश का दुश्मन मानता था और उसने, उनको सबक सिखाया था ! मुल्ले देशद्रोही

मुसोलिनी ने शादी की थी, लेकिन उसने हमेशा अपनी शादी की बात को छुपाये रखी ! जय जसोदा

मुसोलिनी सुंदर स्त्रियों पर बड़ा आसक्त था, उसने अपने शासन के दौर में अपनी प्रेमिकाओं को बड़े पद दिये ! मनु रानी

वो कम्युनिस्टों को विदेशी एजेंट कहता था ! कन्हैया कुमार जेएनयू

मुसोलिनी के समर्थक अपने आपको उसका भक्त कहते थे और मुसोलिनी को भगवान का अवतार बताते थे ! अंधभक्त

उसके भक्तों को उसकी आलोचना बर्दाश्त नहीं होती थी, आलोचकों की, या तो मुसोलिनी या उसके भक्त हत्या करवा देते थे ! गौरी लंकेश, पानेसर कलिबुर्गी

मुसोलिनी एक अखंड देश बनाना चाहता था ! जैसे अखण्ड भारत

मुसोलिनी ने बचपन में अपने पिता के साथ लुहार का काम किया और अपने हर भाषण में अपने बचपन की गरीबी को भुनाया ! चाय चाय

मुसोलिनी एक सैनिक के तौर पर तौर पर भर्ती हुआ था और फिर सारा कम्पटीशन ख़त्म करके पार्टी का सर्वमान्य नेता बन गया ! रथ का सारथी

मुसोलिनी को लिखने का शौक था, उसने समाचार पत्र ‘अवन्टो’ में सम्पादक का काम भी किया लेकिन आपत्तिजनक भाषा की वजह से उसके कई लेख प्रतिबंधित हो गये और उसे नौकरी से निकाल दिया गया ! कर्मयोग प्रतिबंधित

मुसोलिनी अपने पडोसी देशों को इटली का दुश्मन कहता था और अपनी हर नाकामयाबी का ठीकरा उन देशों पर फोड़ता था ! पाकिस्तान का हाथ है

तमाम प्रचार के साधन, अख़बार , पत्र-पत्रिकाएँ मुसोलिनी के प्रचार में लगे थे ! तिहाड़ी तब भी पालतू कुत्ते ही थे

वो अपने विरोधियों को देशद्रोही कहता था ! पाकिस्तान चले जाओ

वो ये प्रचार करके सत्ता में आया था कि वो देश की सभी समस्याओं को चुटकी में ख़त्म कर देगा ! भाइयों भेनौ 60 दिन देदो

और सबसे बड़ी बात मुसोलिनी लोकतंत्र का कट्टर समर्थक था और हर गलत कार्य में लोकतंत्र की दुहाई दिया करता था ! मित्रों।भारतीय लोकतंत्र

वो तानाशाह सत्ता में आने के बाद समस्याओं को तो ख़त्म नहीं कर पाया, लेकिन उसने अपने देश को जरूर बर्बाद कर
दिया था ! सबको दिख रहा है

बिल्कुल यही कहानी हिटलर की है
….
बस हिटलर की कहानी में कुछ पात्र और है
जिनमें पहले नम्बर पर है – जोसेफ गोएबल्स !

जो हिटलर का प्रचार मंत्री था ! गोएबल्स ने प्रचार और प्रोपैगैंडा का इतिहास ही बदल दिया, वो कहता था की एक झूठ को सौ बार बोले तो लोग उसे सच मानने लगते है ! तड़ीपार

गोएबल्स ने रेडियो का अपना हथियार बनाया, सरकारी स्तर पर सस्ता रेडियो बनाकर जर्मनी के घर घर में पहुंचा दिया, रेडियो वार्डन रखे गए जो देखते थे कि आप रेडियो पर भाषण सुन रहे हैं कि नहीं ! स्कूल कॉलेज हर जगह भाषण सुनना अनिवार्य था, नहीं तो गए काम से ! मन की बात

Note – ये सारी बाते सिर्फ हिटलर और मुसोलिनी के बारे में है ! इस पोस्ट से अगर किसी और का सम्बन्ध पाया जाता है तो इसका श्रेय  इतिहास के दोहराव को दें !

अब बात इस तानाशाह के अंत की –

एक वक़्त था जब कुछ अंधभक्तों के साथ साथ देश की जनता भी इनके साथ थी ! उन्होंने उसी के दम से ताज़ गिराए, तख्त उछाले और फिर संसदों में घुसकर कभी हल्ले के साथ तो कभी चुपके से हर संस्था पर काबू पा लिया ! अपने देश के लोगों की महत्वाकांक्षाओं को हवा देकर उन्होंने उसे आग की तरह खूब भड़काया ! उस आग में हाथ तापे और फिर जब वक्त का पहिया घूमा सम्मोहन टूटा तो दोनों उसी आग में पतंगे की तरह जलकर भस्म हो गए !

एक को उसकी प्रेमिका समेत जान से मारकर लाश को चौराहे पर टांग दिया गया !

और उसको मारने के ठीक दो दिन बाद दूसरे ने ने खुद को प्रेमिका के साथ गोली मार ली, और लाश का ठिकाना तक नहीं बचा !

अब दोनो तस्वीर गौर से देखिए –

इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी की वो तस्वीर जो 9 मई 1936 को खींची गई जब मुसोलिनी अपने शीर्ष पर था और रोम के ऐतिहासिक महल की बालकनी में खड़े होकर वो जनता का अभिवादन कर रहा है !


और दूसरी तस्वीर “सिर्फ 9 साल बाद” 29 अप्रैल 1945 की है !

 

इटली की सेनाओं की हार के बाद बचकर भागने की कोशिश करता मुसोलिनी पकड़ लिया जाता है और उसे गिरफ्तार करके गोली मार दी जाती है ! 29 अप्रैल को उसकी लाश एक गैस स्टेशन के पास लाकर टांग दी जाती है ! उसी के देशवासियों ने जो कभी उसे भगवान कहते थे और खुदको भक्त कहलाने में गर्व करते थे, उन्होने ही नफरत से भरके उस लाश पर पत्थर फेंके, थूका और गालियां दीं !

इतिहास खुद को दोहरा रहा है शुरुवात हो चुकी है – गिरिराज वेद

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