कन्नड़ समाचार TV9 ने बताया कि हुबली धारवाड़ से निर्वाचित घोषित किए गए बीजेपी के जगदीश शेट्टार का वीवीपीएटी मैच कराया गया तो ईवीएम से मिलान नहीं हुआ।

वीवीपीएटी और ईवीएम के मिलान न होने पर विधानसभा चुनाव का परिणाम वापस ले लिया गया है। इसके साथ ही जिस भाजपा को 104 सीटों पर बीजेपी को बताया जा रहा था अब उसे 103 सीटों पर ही विजयी माना जाएगा। अगर सभी सीटो पर वीवीपैट की पर्ची से मिलान करा दिया जाय तो बीजेपी 50 सीट से नीचे आ जायेगी।

सवाल सिर्फ एक विधानसभा सीट का नहीं है। ईवीएम और वीवीपैट के मिलान ना होने से बड़ा सवाल उठता है कि क्या ईवीएम टेंपरिंग के जरिए चुनाव परिणाम से छेड़छाड़ की गई है ?

क्या ईवीएम की ही देन है कि भाजपा 100 से ज्यादा सीटें पाने में सफल हुई है ? अगर हर बार चुनाव परिणाम के बाद ईवीएम पर संदेह जताया जाएगा तो निश्चित तौर पर ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

विपक्षी दलों को उस मशीनरी पर विश्वास नहीं है जिसके जरिए जनादेश तय किया जा रहा है ।

कल शाम से ही एक सस्पेंस ड्रामा शुरू हो गया था कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को 103 सीटे मिली कि 104 सीटे ?दरअसल चुनाव आयोग ने कर्नाटक के हुबली धारवाड़ में पहले तो बीजेपी प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित कर दिया पर बाद में रिजल्ट रोक दिया।

इस बात पर हंगामा बढ़ते देख चुनाव आयोग ने डेमेज कंट्रोल करने की कोशिश की ओर बयान दिया कि धारवाड़ विधानसभा सीट पर कुछ बूथों पर VVPAT के खराब होने की सूचना है. चुनाव आयोग इस गड़बड़ी को लेकर विचार कर रहा है. चुनाव आयोग का कहना था कि ये छोटी सी गड़बड़ी मात्र है. फिलहाल इस सीट के नतीजे रोक दिए गए हैं.

लेकिन इस घोषणा से भी बात नही संभली इसलिए देर रात उसने इस सीट से भाजपा उम्मीदवार को फाइनली विजयी घोषित कर दिया किंतु चुनाव आयोग ने इसके लिए जो तर्क दिया वह बड़ा दिलचस्प है उसने कहा , ‘अगर ईवीएम और पेपर स्लिप काउंट के वोट में अंतर पाया जाता है तो पेपर स्लिप काउंट के वोटों को सही माना जाएगा। हुबली धारवाड़ सेंट्रल सीट पर जीत का अंतर 20,000 से ज्यादा वोटों का है और बूथ संख्या 135 ए पर वीवीपीएटी स्लिप की संख्या मात्र 459 है, ऐसे में कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 के नियम 56 D (b) के मुताबिक जगदीश शेट्टर को विजेता घोषित किया जाता

लेकिन इस बात से यह बहस खत्म नही हो जाती, यानी चुनाव आयोग ने खुद माना कि 459 वीवीपीएटी स्लिप में परिणाम कुछ अलग आए और ईवीएम मशीन के परिणाम कुछ अलग आए ,आप याद कीजिए कि मध्यप्रदेश के भिंड के अटेर विधानसभा में पत्रकारों के सामने वीवीपीएटी का प्रदर्शन करने में भी यही हुआ था बटन किसी ओर को दबा रहे थे स्लिप किसी ओर की निकल रही थी, कोई एक या पर्ची की बात नही है 459 बार मिस्टेक हुई है

459 भी कोई छोटा मोटा फिगर नही है एक फेसबुक मित्र बता रहे है कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस 35 सीटो पर 500 से कम अंतर से हारी है, फिर भी उसने रिकॉउंटिंग या vvpat की पर्चियां गिनने की मांग नहीं की तो इस बात से क्या समझा जाए ?

और इस बात से भी क्या समझा जाए जो पिछले दिनों मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए कमलनाथ अपनी पहली प्रेसकांफ्रेन्स में बोलते हैं कि ‘ईवीएम पर न हमें भरोसा है, न जनता को। निर्वाचन आयोग से चर्चा चल रही है। जनता वोट डालती है कांग्रेस को और चला और कहीं जाता है। जनता में यह विश्वास जगाना होगा कि जनता जिसको वोट डाल रही है, उसका वोट वहीं डल रहा है। पूरा देश ईवीएम पर सवाल उठा रहा है। कई जगह गड़बड़ी सामने आ चुकी है भाजपा न जाने क्यों ईवीएम का पक्ष ले रही है।

तो फिर आप क्या हारने के लिए चुनाव में उतरे है ?

कर्नाटक में 38 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद कांग्रेस पिछ्ली बार से आधी सीटों पर कैसे सिमट जाती है, क्या यह सवाल पैदा नही होता कि बड़ी होशियारी से जितना सीट जितने के लिए जरूरत होती है उतना ही वोट शिफ्ट नही किया जा रहा है ?

पिछले दिनो राहुल गांधी इसे मोदी को वोट देने की मशीन बता रहे थे लालू यादव,मायावती ओर अखिलेश यादव इसके खिलाफ बोल रहे थे।

लेकिन सारी पार्टियां इतना बोलने के बावजूद जब चुनाव होते हैं तो मुँह में दही जमा कर बैठ जाती है चुनाव आयोग को यह लिखित में देने को कोई तैयार नही होता कि हमे आपकी इस व्यवस्था में कोई विश्वास नही है और गाली खाने के लिए रह जाते हैं हम जैसे लोग जो लगातार यह मुद्दा सोशल मीडिया पर जिंदा रखे हुए है कि ईवीएम से छेड़छाड़ की पूरी संभावनाए मौजूद हैं लेकिन जो सच है और जो सामने दिख रहा है उस बात पर सवाल उठाने से हमे कोइ रोक नही सकता यह अधिकार हमे संविधान ने प्रदान किया है

बसपा समर्थक देवाशीष झररिया ने ट्वीट किया है

डा आनंद राय ने भी ईवीएम पर टवीट किया