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शर्म है कि उनको नही आती, पीएम मोदी की हर बात झूठ, नेहरू जी और भगत सिंह अच्छे दोस्त थे – ट्रिब्यून

पीएम मोदी के लगातार झूठ बोलने का बाद तमाम मीडिया हाऊस ने एक्सपोज करने के लिये उनकी सभी झूठी रिपोर्ट्स की सत्यता का पता लगाने के लिए नई दिल्ली स्थित नेहरू म्यूजियम और लाइब्रेरी से 10 अगस्त 1929 को प्रकाशित ट्रिब्यून अखबार की वेरिफाइड कॉपी की जांच की और तथ्यों का पता लगाया।

सोशल मीडिया पर मोदी और भगत सिंह की एक फोटोशाप वायरल हो रही है जिससे नरेन्द्र मोदी की बहुत भद्द पिटती जा रही है।

 

लाहौर से प्रकाशित ट्रिब्यून अखबार के सायंकालीन संस्करण के पहले पन्ने पर पंडित जवाहर लाल नेहरू, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की मुलाकात की खबर प्रकाशित की है. खबर की हेडलाइन, “Pt. Jawaharlal Interviews Hunger Strikes” है. खबर की तस्वीर यहां देखी जा सकती है, जिसे पढ़ा जा सकता है।

खबर कहती है, “पंडित जवाहर लाल नेहरू एमएलसी डॉक्टर गोपीचंद के साथ लाहौर जेल गए और बोर्स्टल जेल में लाहौर षड्यंत्र केस में भूख हड़ताल कर रहे सत्याग्रहियों से मुलाकात की और उनका साक्षात्कार किया.” पंडित जवाहर लाल पहले सेंट्रल जेल गए जहां उन्होंने सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त से मुलाकात की और भूख हड़ताल के बारे में उनसे बातचीत की।

इस बातचीत के बारे में नेहरू ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा है और ये बताया है कि वे भगत सिंह से किस तरह प्रभावित थे. नेहरू ने लिखा, ‘मैं उस समय लाहौर में था, जब भूख हड़ताल को एक महीने हो गए थे. मुझे जेल में बंद कैदियों से मुलाकात की परमिशन दी गई और मैंने इसका लाभ उठाया.’ उन्होंने लिखा, “मैंने पहली बार भगत सिंह, जतींद्र दास और अन्य लोगों को पहली बार देखा.”
“वे सब लोग बहुत कमजोर दिख रहे थे और बिस्तर पर थे, उनसे बहुत ज्यादा बात करना भी मुश्किल लग रहा था. भगत सिंह के पास एक आकर्षक बौद्धिक चेहरा था, जो उल्लेखनीय रूप से शांत था. उनमें कोई क्रोध नहीं दिख रहा था. उन्होंने बहुत ही सज्जनता से बात की, लेकिन मुझे लगा कि जो कोई भी एक महीने तक उपवास करता है आध्यात्मिक और सौम्य दिखता है।

जवाहर लाल यूनिवर्सिटी की इतिहासकार मृदुला मुखर्जी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान से चकित हैं। उन्होंने कहा, ‘ये सबको पता है कि नेहरू और भगत सिंह एक दूसरे के प्रशंसक थे. जब भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारी जेल में थे, तो नेहरू ने न केवल उनसे मुलाकात की, बल्कि इस बारे में एक पत्र भी लिखा और सार्वजनिक रूप से बयान भी दिए।

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