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मोदी अमित शाह

किसानों के कर्ज के लिए मोदी कहते है कि राज्य अपने पास से दे लेकिन जब कारपोरेटस हजारो करोड़ डुबाते है तो इनकी जुबान चिपक जाती है

एक आम आदमी यदि घर के लिया गया कर्ज भर नही पाता है तो बैंक द्वारा बकायदा उसके घर की नीलामी डोंडी पिटवा कर की जाती है।

एक किसान जब फसल तैयार करने के लिए बैंक से कर्ज लेता है और उसे नुकसान होता है तो उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता हैं।

लेकिन जब जब एक बड़ा कारपोरेट बैंक से कर्ज लेता है और उसे नही चुका पाता तो बैंक उसका कर्ज को बट्टे खाते में डाल देता है।

जब किसानों की कर्ज माफी की बात आती है तो वित्तमंत्री अरुण जेटली साफ बोल देते है कि राज्य अपने पास से यह पैसा दे लेकिन हजारो करोड़ बट्टे खाते में डालना होता है तो इनके माथे पर शिकन तक नही आती क्योंकि ये पैसा उन कारपोरेट घरानों ने डुबोया है जो इन्हें मोटा चन्दा देते हैं, उनका नाम तक बताने में इनकी जुबाने तालु से चिपक जाया करती है।

आपको यह तथ्य भी जरूर जानना चाहिए जो कल सामने आया है 2016-17 में कुल 81,683 करोड़ रुपये के बैड लोन को बट्टे खाते में डाल दिया जो पांच साल में सर्वाधिक हैं अकेले स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने 2016-17 में 20,339 करोड़ रुपये के बैड लोन को बट्टे खाते में डाल दिया जो सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य सभी बैंकों में सबसे ज्यादा हैं यह आंकड़ा उस वक़्त है जब भारतीय स्टेट बैंक में अन्य बैंकों का विलय नहीं किया गया था।

आपको इन पांच साल के आंकड़े भी ध्यान से देखना चाहिए क्योंकि इसकी भरपाई हमारे द्वारा दिये जा रहे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करो से की जा रही है दूसरे शब्दों में कहू तो यह आपका हमारा पेट काट कर बड़े पूंजीपतियों का घर भरा जा रहा है।

साल बट्टे खाते की रकम

2012-13 27,231 करोड़ रूपये
2013-14 34,40 9 करोड़ रुपये
2014-15 49,018 करोड़ रुपये
2015-16 57,585 करोड़ रुपये
2016-17 81,683 करोड़ रुपये

यानी 15-16 के मुकाबले सीधे 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी सिर्फ यही आंकड़ा आपको नोटबन्दी जैसे निर्णय की सफलता की कहानी कह देगा।

बताया जा रहा है कि 2017- 18 के वित्त वर्ष के पहले 6 महीने 53 हजार करोड़ रुपये राइट ऑफ किये जा चुका है और सभी जानते हैं कि इसी बट्टे खाते की रकम को एडजस्ट करने के लिए सरकार 2 लाख 11 हजार करोड़ रुपये बैंको को देने जा रही है लेकिन आप ये नही जानते होंगे कि हम 2013-14 से लेकर चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही के बीच कुल 3 लाख 79 हजार 80 करोड़ रुपये हम आलरेडी बैंको को दे चुके हैं जबकि उसके पहले बीते दस वर्षो में महज करीब दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा था।

याद रखिए तेल तिल्ली से ही निकलता है यानी यहाँ भी इस डूबे हुए कर्ज की भरपाई आम आदमी से टेक्स का बोझ बढ़ाकर की जाएगी, बाकी आप लोग लगे रहिये राम मंदिर, बाबरी मस्जिद करने में।

सरकार को पता है जनता को 100 रु लीटर पेट्रोल क्यो न खरीदना पड़े, चाहे बढ़े हुए टेक्स देने के बाद उनके पास कोई बचत न बचे, चाहे उनके बच्चों के पास कोई रोजगार न भी हो, चाहे अर्थव्यवस्था का दीवाला भी निकल जाए तो भी वोट तो जाति धर्म सम्प्रदाय से जुड़े मुद्दों पर ही देंगे – गिरीश मालवीय

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