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जज लोया

जस्टिस लोया की रहस्यमय मृत्यु के मामले पर मीडिया को खुली छूट मिलने के बाद भी खामोश क्यो है ?

जस्टिस लोया की रहस्यमय मृत्यु से सम्बंधित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कल जोरदार बहस हुई लेकिन मुख्य मीडिया फिर एक बार इस मुद्दे पर ख़ामोश ही बना रहा जनचौक ने इस सुनवाई की पूरी रिपोर्ट विस्तार से प्रकाशित की है उस आलेख के मुख्य बिंदु यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

याचिकाकर्ता बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन की तरफ से पेश वकील दवे साहब ने महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट पर बेहद महत्वपूर्ण आपत्तियां प्रस्तुत करते हुए इसे खामियों ओर अंतर्विरोधों का पिटारा बताया है
दवे के अनुसार इस रिपोर्ट में निम्न संदेहास्पद तथ्य सामने आए हैं।

(1) “जब लोया को कथित दिल का दौरा पड़ा तो जिन चार न्यायाधीशों के बयान दर्ज किए गए हैं उनमें से कोई भी उनके पास मौजूद नहीं था। वहां डॉ. प्रशांत राठी नाम का केवल एक शख्स था जिसका दावा है कि लोया ने उसे बुलाया था। उन्हें नागपुर के डांडे अस्पताल ले जाया गया जहां से उन्हें मेडट्रिना अस्पताल में शिफ्ट किया गया। 1 दिसंबर 2014 को दर्ज पुलिस रिपोर्ट या फिर कोई अन्य दस्तावेज किसी न्यायाधीश की मौजूदगी का जिक्र नहीं करता है।”

(2) लोया के पहले सोहराबुद्दीन एनकोउन्टर केस देख रहे जज जेटी उत्पट के तबादले के हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना करते हुए दवे ने कहा कि “ 6 जून 2014 को कोर्ट में उपस्थिति से बचने की इच्छा पर उत्पट ने अमित शाह को फटकार लगायी थी। उसके बाद उन्हें हट जाने का निर्देश दिया गया था। और उन्हें पुणे जाने के लिए कहा गया था। ये बिल्कुल संदेहास्पद था। 31 अक्तूबर, 2014 को लोया, जिन्होंने शाह को पेशी से छूट दी थी, ने पूछा कि उस तारीख को मुंबई में होने के बावजूद शाह कोर्ट से क्यों गैरहाजिर रहे। और अंत में लोया की 1 दिसंबर, 2014 को मौत हो गयी।”

उन्होंने कहा कि “एक ऐसे मामले में जिसमें तीन लोगों की हत्या हुई हो भारतीय दंड संहिता की धारा 227 के तहत आवेदन स्वीकार्य नहीं है।”
(3) जब जज लोया को हार्टअटैक की बात सामने आयी तो चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार साथ के गेस्ट हाउस में थे। उन्होंने लोया की पत्नी और परिवार को क्यों नहीं फोन किया? वो उन्हें सबसे अच्छे अस्पताल में क्यों नहीं लेकर गए? राठी का बयान सुबह 8.33 बजे दर्ज किया गया जबकि मौत सुबह 6.15 पर हुई। लेकिन बयान में किसी भी दूसरे की मौजूदगी का जिक्र नहीं है।”

(4) मेडिट्रिना अस्पताल में जब डाक्टर ने लोया की मौत की सूचना दी तब राठी ने औपचारिकताओं को पूरा कर उनके शव को परिवार के दूर होने के चलते उनके पैतृक निवास लातूर भेजने पर जोर दिया। दवे ने कहा कि “ ये कैसे संभव है? शरीर को लातूर क्यों ले जाया गया ?

(5) रिपोर्ट के अनुसार जिस जज मोदक ने सुबह 5 बजे पत्नी को फोन कर बीमारी की बात की थी उसी जज मोदक ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें नहीं पता कि लोया की पत्नी को किसने फोन किया था।”।

(6) पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पूरी साख पर संदेह जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि ये लोया की शरीर की स्थिति की व्याख्या कर देती है। दवे ने कहा कि “ रिपोर्ट के मुताबिक पोस्टमार्टम निधन के चार घंटे बाद सुबह 10.50 बजे हुआ। शरीर उस समय तक पूरी कड़ी हो जानी चाहिए थी।” वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने इसमें आगे जोड़ते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ओवरराइटिंग है। “1 दिसंबर के नीचे नवंबर 30 या फिर 31 लिखा गया है।” बेंच उनकी इस बात से सहमत होती है “एक शख्स जो दिल का दौरा पड़ने की कथित तौर पर शिकायत कर रहा है वो बिल्कुल सुबह एक भूरी शर्ट, जींस और काली बेल्ट पहने हुए है।”

(6) “क्या इसी तरह से एक मौजूदा जज की मौत की जांच की जाती है ? जिसमें शरीर को 1 जनवरी को दिया गया था लेकिन उसकी रिपोर्ट 5 फरवरी को आयी ?”

(7) रवि भवन के रजिस्टर में लोया का कहीं जिक्र नहीं है। जबकि न्यायपालिका से जुड़े हर शख्स का जिक्र है जो भी वहां रुका था। जयसिंह ने कहा कि वो एक कमरे में दो दूसरे जजों के साथ सोएंगे? उन्होंने कहा कि वहां दो बिस्तर और तीन लोग थे। ये अजीब लगता है। लेकिन फिर भी अगर ऐसा था तो गेस्टहाउस में सभी लोगों को अलग-अलग दर्ज किया गया है।

(8) दवे ने कहा कि क्यों हाजी अली में मौजूद लोया के मित्रों से संपर्क करने की कोशिश की गयी ? उन्होंने उनकी पत्नी से क्यों नहीं संपर्क किया ? क्या किसी पत्नी का स्वभाव हो सकता है कि वो अस्पताल की तरफ नहीं भागती जबकि नागपुर के लिए सुबह तीन-तीन फ्लाइट मौजूद हैं। आरटीआई के हवाले से लोया की सिक्योरिटी वापस लिए जाने वाली जानकारी को भी दवे ने बेंच के सामने रखा। जिसे 24 नवंबर 2014 को वापस ले लिया गया था।

(9) दवे ने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा कि अमित शाह की रिहाई के मामले में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं- जहां चार्जशीट दायर की गई उसकी पृष्ठभूमि, पुलिस अफसरों का छूटना और पहले जज का तबादला और मामले में दूसरे जज की मौत। मामले को पहली नजर में खारिज नहीं किया जा सकता है।

अदालत की इस कार्यवाही को जनता के समक्ष लाने के लिए जनचौक के महेंद्र मिश्रा को धन्यवाद दिया जाना चाहिए बताओ दे अगली सुनवाई सोमवार को 2 बजे फिर होगी।

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