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जज लोया

मीडिया में जज लोया के बारे में जो छपा है हम इस पर नहीं जाएंगे, बल्कि दस्तावेज क्या कहते है इस पर जाएंगे.

नई दिल्ली: अमित शाह के गले फांस बनता जा रहा जज लोया की मौत के मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला गंभीर है और हम सारे कागजात देखेंगे. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि सारे पक्षकार कोर्ट के सामने सारे दस्तावेज सील बंद कवर में दाखिल करेंगे. इतना ही नहीं बॉम्बे हाईकोर्ट से इस मामले मामले को सुप्रीम कोर्ट में  ट्रांसफर कर दिया गया है. अब इस मामले की सुनवाई 2 फरवरी से होगी.

जज लोया की मौत की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि ये बेहद गंभीर मामला है. इसमें सभी दस्तावेजों को हमें देखना होगा. इस मामले में सभी तरह के दस्तावेजों जैसे RTI आदि को एक जगह करके कोर्ट को दिए जाएं. एक जज की मौत हुई है और उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. न्यूज पेपर में कई बार मौत को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं. ऐसे में न्यूज पेपर में जो छपा है हम इस पर नहीं जाएंगे, बल्कि दस्तावेज क्या कहते है इस पर जाएंगे.

जब चीफ जस्टिस हुए गुस्‍सा 
इस मामले की सुनवाई के दौरान हरीश साल्वे ने कहा था कि सब बातें मीडिया में नहीं आनी चाहिए. इस पर वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि चीफ जस्टिस ने पद्मावत पर भी आदेश जारी किया है. इस तरह मीडिया पर गैग नहीं लगाया जा सकता. इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा गुस्सा हुए और उन्‍होंने कहा कि अब तक उन्‍होंने एक शब्द नहीं बोला है और प्रेस पर गैग आर्डर के बारे में वो कुछ नहीं कर रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि ये गलत है और वो इससे दुखी हुए हैं. उन्होंने इंदिरा जयसिंह से बिना शर्त माफी मांगने को कहा, जिसके बाद जयसिंह ने माफी मांगी.

सुनवाई के दौरान वकील दुष्‍यंत दवे ने कई बार लिया अमित शाह का नाम 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों को एक-दूसरे से सभी दस्तावेज साझा करने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के दौरान दुष्यंत दवे और हरीश साल्वे बीच तीखी बहस हुई. कई बार अमित शाह का नाम लेने पर भी गरमागरमी हुई. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने वकील दुष्यन्त दवे को कहा कि अभी तक के हिसाब से ये प्राकृतिक मौत है आप बार-बार किसी का नाम क्यों ले रहे है ( अमित शाह का नाम लिए बगैर कहा). महाराष्ट्र सरकार के वकील हरीश साल्वे ने ऐतराज जताया और कहा कि अमित शाह का नाम बार-बार क्यों ले रहे है जबकि वो इस समय अदालत में मौजूद भी नहीं है. अमित शाह का नाम लेने से इन्हें रोका जाए. दरअसल, दुष्यन्त दवे ने चीख के तीन बार कहा था कि साल्वे अमित शाह को बचाना चाहते है. हालांकि उन्होंने कहा कि अभी तक ये प्राकृतिक मौत है जिसकी जांच की मांग है.

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, RTI के जवाब ने पैदा किए कई सवाल
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील दुष्यन्त दवे ने सवाल उठाए. इस संबंध में RTI का जवाब है जिससे कई सवाल पैदा होते हैं. लोया की मौत होने के बाद सुबह उनके परिवार वालों को नागपुर नहीं बुलाया गया. हरीश साल्वे ने अमित शाह के वकील रहे है ऐसे में इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कैसे पेश हो सकते है. ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वो महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश हो रहे है. ये संस्थान को नुकसान पहुंचा रहे है इन्हें रोका जाए. इस मामले में एमिकस नियुक्त किया जाए और अटॉनी जरनल कोर्ट को असिस्ट करें. वहीं हरीश साल्वे ने इस पर आपत्ति जताई.

सोहराबुद्दीन ट्रायल के जज बी एच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की याचिका पर CJI दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड  की बेंच ने सुनवाई की. इससे पहले 16 जनवरी को जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस मोहन एम शांतनागौदर की बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग करते हुए  कहा था कि इस मामले को उचित बैंच के सामने लगाया जाए. गौरतलब है कि लोया मामले को जस्टिस अरूण मिश्रा की बेंच में लगाने का विरोध किया गया था और चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि उन्होंने चीफ जस्टिस से मुलाकात कर बात रखी थी. शुक्रवार को CJI दीपक मिश्रा ने कहा था कि मामले की सुनवाई 22 जनवरी को रोस्टर के मुताबिक उचित बेंच करेगी.

अपनी शामों को मीडिया के खंडहर से निकाल लाइये…

दरअसल, कांग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र के एक पत्रकार बंधुराज संभाजी लोने ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की है. जज लोया की मौत पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है.

क्‍या है मामला
साल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात पुलिस ने हैदराबाद से अगवा किया. आरोप लगाया गया कि दोनों को फर्जी मुठभेड में मार डाला गया. शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया. उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड का गवाह माना जा रहा था. साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया. शुरुआत में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहे थे लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश ना होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया. फिर केस की सुनवाई जज बी एच लोया ने की और दिसंबर 2014 में नागपुर  में उनकी मौत हो गई.

साभार एनडीटीवी

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