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मैं आया नहीं हूँ बल्कि माँ गंगा ने बुलाया है, गंगा सफाई पर नाकाम मोदी

गंगा सफाई भी मोदी जी का जुमला निकली. कैग ने मोदी सरकार के नमामि गंगे अभियान पर बड़े सवाल खड़े किये हैं। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार अभियान के लिए आवंटित राशि खर्च ही नहीं कर पा रही है। इस कारण अभी तक गंगा की सफाई अधर में है।

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एनएमसीजी के बीते तीन वर्षों के लेखा-जोखा का अध्य्यन करने के बाद कैग इस नतीजे पर पहुंचा है कि गंगा स्वच्छता के लिए आवंटित धनराशि में से महज 8% से 63% ही खर्च हो सकी है। इसके अलावा कैग ने आवंटित राशि के सही ढंग से खर्च न हो पाने और उसका लेखा परीक्षा न करा पाने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

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कैग को ऐसे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ही था, क्योंकि यह साफ दिख रहा है कि गंगा सफाई अभियान सुस्ती के साथ ही देरी का भी शिकार है। यह स्थिति तब है जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा को साफ-स्वच्छ करने के प्रति प्रतिबद्धता जताई थी। क्या यह विचित्र नहीं कि मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली एक महत्वपूर्ण योजना कहीं पहुंचती नहीं दिख रही है और वह भी तब जब मोदी सरकार के कार्यकाल का साढे़ तीन साल का समय बीत चुका है।

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खर्च की रफ्तार पर चिंता जताते हुए कैग ने कहा है कि एनएमसीजी निर्धारित समय अवधि में राशि का व्यय नहीं कर सका जोकि परियोजना की योजना एवं इसके कार्यान्वयन में देरी को दर्शाता है। ये हाल तब है जब सरकार के साथ-साथ किस्म-किस्म के सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक संगठन गंगा को साफ करने के लिए सक्रिय हैं।

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गौरतलब है कि 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गंगा की सफाई को मुद्दा बनाते हुए चुनाव में इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बनारस में कहा था कि ‘मैं आया नहीं हूँ बल्कि माँ गंगा ने बुलाया है’। लेकिन रिपोर्ट को देखे तो सत्ता हासिल करते ही मोदी गंगा के साथ अपना रिश्ता भूल गए।

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यह कोई छिपी बात नहीं कि जब सरकार किसी योजना-परियोजना के लिए आवंटित राशि खर्च करने से बचती दिखती है तो इसका एक मतलब यह भी होता है कि वह भावी भ्रष्टाचार से आशंकित है।

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