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बीजेपी या संघ मे ऐसा कौन है जो योगी जी को खुलकर काम नही करने दे रहा है ! 

योगी आदित्य नाथ जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे ये किसी ने सोचा नहीं था.कारण उनका हिंदूवादी होना था.राजनीति के बड़े बड़े पंडित भी ये कयास नहीं लगा पा रहे थे कि योगी मुख्यमंत्री होंगे.यहाँ तक कि एक न्यूज़ चैनल पर योगी जी ने भी कहा था कि उनको भी नहीं पता था कि वो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

योगी जी मुख्यमंत्री की रेस में नहीं थे केशव प्रसाद मौर्या का नाम तो कभी मनोज सिन्हा का नाम हवा में गूंज रहा था.मनोज सिन्हा दिल्ली से अपने गृह जनपद भी पहुँच गए थे साथ ही जिस तरह से वो मंदिरों में पूजा आदि कर रहे थे उससे उनका मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ लेना तय माना जा रहा था.इसी बीच योगी को विशेष विमान से दिल्ली बुलाना माहौल में सस्पेंस पैदा कर दिया था।

खैर योगी जी मुख्यमंत्री हुए जनमानस में एक सन्देश गया कि अब सत्ता ईमानदार हाथ में है.सत्ता ऐसे हाथ में है जिन्होंने गरीबी भूख देखी है.जिन्होंने अब तक समाज के लिए ही जिया है.समाजसेवा ही उनका धर्म है.बढ़ता अपराध उत्तर प्रदेश की बड़ी समस्या है जिसकी वजह से सत्ता भी गवानी पड़ती है।

योगी जी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में ही कह दिया कि अपराधी प्रदेश छोड़कर चले जाएँ। इस फरमान के बाद हफ्ते दस दिन तक पूरा प्रदेश शांत हो गया कहीं से कोई भी अपराधिक घटना की सूचना नहीं मिली।

जो ईमानदार थे उनके सीने चौड़े हो गए थे वो सर उठाकर चलना शुरू ही किये थे की सहारनपुर में दंगा भड़क उठा और इसी के साथ योगी सरकार की बदनामियों का सिलसिला शुरू हुआ.सहारनपुर दंगे से शुरू हुआ बदनामियों का सफ़र रुकने का नाम नहीं ले रहा है वो भी तब जब इतने अधिकारी सस्पेंड किये जा रहे है,प्रदेश में इन्काउन्टर का रिकॉर्ड कायम हो चूका है।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि योगी की राह कौन रोक रहा है.जबकि योगी बीजेपी की जरुरत बन चुके है केरल, कर्णाटक, गुजरात आदि प्रदेश में स्टार प्रचारक की भूमिका निभा चुके हैं और निभा रहे हैं.योगी जी जिस तरीके से भाजपा के प्रचार का जिम्मा उठायें है उससे लगने लगा है कि मोदी के बाद योगी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

लेकिन उत्तर प्रदेश में जिस तरीके से योगी सरकार की बदनामी हो रही है कहीं ना कहीं इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है.गोरखपुर में हुए बच्चों की मौत के बाद बच्चों को स्वेटर बाँटने में नाकाम योगी सरकार की बदनामी गली मोहल्लों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

लोगों का कहना है योगी इतने सख्त हैं जिनसे अधिकारी तक कांपते है फिर प्रदेश में ऐसा कैसे हो रहा है.कौन है इसके पीछे.गरीबों में कम्बल बटना हो,किसानो की कर्ज माफ़ी हो या विधान सभा के पास फेका गया आलू सभी चर्चा का विषय बना हुआ है.लेकिन खास बात यह है कि लोग योगी को बुरा नहीं कह रहे हैं।

लोगों का कहना है इसके पीछे कोई है जो साजिशन योगी सरकार की बदनामी करा रहा है। विपक्ष में इतनी ताकत बची नहीं है कि वो कोई साजिश करे और पक्ष पर संदेह करना भी गुनाह है फिर आखिर है कौन जो योगी की राह का रोड़ा बना हुआ है ?

अभी हाल ही में आरएसएस और योगी जी की हुई मीटिंग में आरएसएस ने भी साफ़ साफ़ शब्दों में कह दिया कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो 2019 में 40 सीटें भी लाना बीजेपी के लिए कठिन होगा.साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देने को कहा लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही विभाग योगी सरकार को बदनाम करने में जुटे हैं रहा सहा कसर कानून व्यवस्था पूरा कर दे रहा है।

कासगंज दंगा सरकार को बड़ी बदनामी दे गया। उत्तर प्रदेश में पिछली सरकारों जैसा माहौल बन चुका है ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जिस दिन हत्या,बलात्कार,अपहरण,लूट डकैती आदि की घटना ना घटित हो।

रोज-रोज कानून व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारों के पेंच कसे जाते हैं फिर भी असर नहीं है। जिस प्रदेश में 3-3 मुख्यमंत्री हो उस प्रदेश का ऐसा हाल ठीक नहीं है। भाजपा को अगर लम्बे समय तक राज करना है तो योगी जी को ऐसे लोगों को चिन्हित करने की जरुरत है जो उनके राह का रोड़ा बन रहे हैं।

प्रचंड बहुमत की सरकार को ऐसी बदनामी झेलना पड़े ये ठीक नहीं है ऐसे में जनता का भरोसा सरकार से उठने लगा है। योगी जी पर तो कोई ऊँगली नहीं उठा सकता लेकिन सरकार और संगठन को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अभी भी काफी समय है 2019 लोकसभा चुनाव में अगर इस बीच योगी सरकार शिक्षा और स्वास्थ को गरीबों तक पहुँचाने में सफल होती हैं और प्रदेश को अपराध मुक्त करने में सक्षम होती है तो बीजेपी यहाँ 2014 जितनी सीटें जितने में कामयाब हो जाएगी – जितेन्द्र झा की रिपोर्ट

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