गुड़गांव में स्कूल बस पर पथराव में करणी सेना के सद्दाम, आमिर, नदीम, फिरोज और अशरफ पकड़े गए।” यह सन्देश अभी सोशल मीडिया पे वायरल है। एक चौंकाने वाली घटना की तरह, फिल्म पद्मावती के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान, गुरुग्राम में सोहनी रोड पर एक स्कूल बस पर कल हमला किया गया था। इस हमले का एक वीडियो वायरल होता चला गया जिसमें छोटे बच्चों को डरते हुए दिखाई दे रहे थे क्योंकि बस को पत्थरों से धराशायी किया जा रहा था इस घटना की पूरे देश में लोगों ने नाराजगी प्रगट की। गुरूग्राम पुलिस ने स्कूल बस पर इस हमले के लिए 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद, एक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा, जिसमें दावा किया जा रहा कि इस मामले के आरोपी सद्दाम, आमिर, नदीम, फिरोज और अशरफ थे।

गुड़गांव में स्कूल बस पर पथराव में करणी सेना के सद्दाम, आमिर, नदीम, फिरोज और अशरफ पकड़े गए ।

इस संदेश को प्रसारित करने में सबसे पहला नाम जिस व्यक्ति आता है वो शालिनी कपूर हैं, जो खुद को भाजपा के युवा शाखा के भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेयूएम), के “कन्या शक्ति क्रांति” की “क्षेत्रीय प्रभारी” बताती है।

Bharatiya Janta Yuva Morcha

ऐसे प्रमुख प्रोफाइलों में तीन ऐसे नाम है जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी जी ट्वीटर पे फॉलो करते हैं, Jay @Saffron_RocksJitendra Pratap Singh @jpsin1 और Kunwar Ajaypratap Singh @sengarajay235 ने भी ये खबर प्रसारित किया।

इस जानकारी को सत्यापित करने के लिए Alt News ने संदीप खिरवार, पुलिस कमिश्नर गुरुग्राम के साथ बात की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही जानकारी बिल्कुल गलत है और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले आरोपी के नामों में से कोई भी वास्तविक नामों के साथ मेल नहीं खाता है।

इस अफवाह अभी सोशल मीडिया पर वायरल है और फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसे विभिन्न माध्यमों पर प्रति मिनट कई बार प्रसारित किया जा रहा है। देश में किसी भी उथल-पुथल के लिए मुस्लिम नामों को डालने का दछिणपंथीयों का एक पुराना हथकंडा है। हाल के दिनों में, इसी रणनीति के तहत कुछ ऐसे खबरें तैयार की गयी थी, जब आगरा के फतेहपुर सीकरी में एक स्विस दम्पति पर हमला किया गया था और जब दिल्ली में ई-रिक्शा चालक की हत्या हुई थी। संवेदनशील घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी दावे को आधिकारिक समाचार स्रोतों के माध्यम से पुन: पुष्टि किया जाना चाहिए और सत्यापन के बिना प्रसार नहीं होना चाहिए। यह न केवल कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का काम मुश्किल बना देता है बल्कि समाज का भी ध्रुवीकरण करता है।