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क्या बाबा रामदेव जानवरों की हड्डियों के चूरा मे मानव अंगों को मिलाते हैं !

2005 में हुए बाबा रामदेव की कंपनी दिव्य योग फार्मेसी के मजदूरों का विवाद शायद ही याद हो।

अरे वही विवाद जिसमें दिव्य योग फार्मेसी के मजदूरों ने अपने शोषण के साथ दवाओं में जानवरों की हड्डियों के चूरा के साथ मानव अंगों को मिलाने का आरोप लगाया था। उस वक़्त मज़दूरों की लड़ाई में वृंदा करात ने समर्थन व साथ दिया था। मनुष्य अंग होने की शंका तब हुई जब एक अंगुली की हड्डी में अंगूठी पाया गया। इससे ज़ाहिर था कि वो हड्डी किसी मनुष्य की थी।

इस पर मज़दूर भड़क गए और हड्डी का चूरा मिलाये जाने की बात बाहर आ गयी। बाद में 21 मई 2005 को हरिद्वार के श्रमायुक्त ने कंपनी प्रबंधन व मज़दूरों में समझौता करा दिया। समझौते के तहत जब दूसरे दिन मज़दूर सुबह काम पर गए तो उन्हें गेट से वापस भगा दिया गया।

श्रम अदालतों से लेकर हाई कोर्ट तक मज़दूरों ने यह लड़ाई सीटू के नेतृत्व में लड़ी। और हाई कोर्ट ने मज़दूरों को बड़ी राहत देते हुए दिव्य योग फार्मेसी को आदेश दिया है कि वो 93 मज़दूरों को वापस काम पर रखे और 2005 से तेरह वर्षों का वेतन भी दे जो कि 14.50 करोड़ होता है। मज़दूरों की यह एक बड़ी जीत है। सारे मज़दूरों के साथ सीटू को बधाई……

यह खबर 9 जनवरी के फाइनेंसियल एक्सप्रेस में निकला है। पर हिंदी के किसी अखबार में मैंने यह खबर अभी तक नहीं देखी – मसूद अख्तर की रिपोर्ट

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